गद्य शिल्प
मानवीकरण
किसी वस्तु, प्राणी या अमूर्त धारणा का व्यक्ति या व्यक्ति-जैसे गुणों के साथ चित्रण: मौत, ऋतुएँ और गुण, सबको एक चेहरा।
मानवीकरण "किसी भी वस्तु, प्राणी या अमूर्त धारणा का व्यक्ति के रूप में या व्यक्ति-जैसे गुणों के साथ चित्रण" है। लेख इसे एंथ्रोपोमॉर्फ़िज़्म से अलग रखता है, जो "मानवीय लक्षणों, भावनाओं या मंशाओं को ग़ैर-मानव हस्तियों पर आरोपित करना" है: मानवीकरण चीज़ को व्यक्ति बना देता है। इसके विषय शहरों और देशों से लेकर ऋतुओं, तत्वों, मौत, गुणों और दोषों तक जाते हैं। अलंकार-शास्त्र ने इसे जल्दी पढ़ा: लगभग 300 ईसा पूर्व के फ़ालेरुम के Demetrius "prosopopoeia का वर्णन करने वाले अलंकार-शास्त्र के पहले लेखक" थे, और साहित्य ने इसी से पूरे रूपक रचे, Prudentius की लड़ती गुण-शक्तियाँ, Boethius की दर्शन-सुंदरी (Lady Philosophy), Piers Plowman और The Pilgrim's Progress।
उपन्यासकारों के लिए यह गद्य का सदा-बुलावा बना हुआ है: धमकाता मौसम, इंतज़ार करता घर, दस्तक देती स्मृति। एक ऐसा हस्तांतरित बिंब रूपक (metaphor) होता है जो मानवीकरण का काम करता है, और ऐसे अलंकारों से बनी पूरी कथा-प्रणाली कठोर होकर रूपक (allegory) बन जाती है।